रोचक तथ्य : निधिवन का रहस्य, क्या सच में रास रचाने आते हैं रात में राधा कृष्ण

रोचक तथ्य : निधिवन का रहस्य, क्या सच में रास रचाने आते हैं रात में राधा कृष्ण

धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी धार्मिक स्थान है। मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं। रास के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं। रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है।

निधिवन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से करीब 15 किलोमीटर दूर यमुना जी के तट पर बसा है। लोग इसे मधुवन के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात में गोपियों के साथ रासलीला की थी और तब से श्रीकृष्ण यहां रोज रात गोपियों के साथ रासलीला करते हैं। शरद पूर्णिमा की रात यहां पूरी तरह से प्रवेश वर्जित रहता है। दिन में श्रद्धालु आ-जा सकते हैं, पर शाम होते ही निधिवन खाली करवा लिया जाता है।

तुलसी के पेड़ बनते हैं गोपिया

मान्यता के अनुसार जब श्रीकृष्ण रात में रासलीला करते हैं तब निधिवन के तुलसी के पेड़ गोपियों का रूप धारण कर लेते हैं। सुबह होते ही रासलीला खत्म होती है और गोपियां फिर से तुलसी के पेड़ का रूप धारण कर लेती हैं। यहां लगे पेड़ों की शाखाएं नीचे की ओर बढ़ती हैं। ये पेड़ इस कदर फैले हैं कि रास्ता बनाने के लिए इन पेड़ों को डंडे के सहारे रोका गया है।

जंगल की तरफ खिड़की नहीं बनाते लोग

आस्था के साथ-साथ लोगों का डर भी इस जंगल के प्रति बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि कोई भी रात के समय इस जंगल की तरफ नहीं देखता। जो भी इस तरफ देखता है वो या तो अंधा हो जाता है या फिर पागल हो जाता है। इसी वजह से यहां के लोग जंगल की तरफ खिड़की नहीं बनाते। जिनके घर में खिड़की है वो शाम सात बजे मंदिर की आरती का घंटा बजते ही उसे बंद कर देते हैं। कुछ लोगों ने तो ईंटों से खिड़की बंद कर दी है ताकि कोई गलती से भी रात में जंगल की तरफ न देखे।

रंग महल में सजता है बिस्तर

शाम सात बजे से पहले रंग महल में राधा और श्रीकृष्ण के चंदन के पलंग को सजा दिया जाता है। पलंग के पास में एक लोटा पानी, राधाजी के श्रृंगार का सामान, दातुन और पान भी रखा जाता है। सुबह बिस्तर अस्त-व्यस्त मिलता हैं और लोटा खाली मिलता है। वहां पर उपयोग की हुई दातुन भी पड़ी रहती है। पान भी खाया हुआ मिलता है। ऐसी मान्यता है कि श्रीकृष्ण और राधा रानी इन सभी चीजों का उपयोग करते हैं।